उत्तर प्रदेश

लखनऊ में भरभराकर ग‍िरा अलाया अपार्टमेंट, LDA अधिकारियों पर कार्रवाई तय

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA ) के उन अभियंताओं के नामों को खोजने का काम शुरू हो गया है, जिनके कार्यकाल में इस अवैध निर्माण को खड़ा किया गया था। बिल्डर से मिलीभगत करके बनाई गई बिल्डिंग में मानकों की खूब अनदेखी हुई। जी प्लस टू का भी नक्शा पास नहीं है। उल्टे बिल्डर ने पांच मंजिला अलाया अपार्टमेंट खड़ा कर दिया गया। यही नहीं अभियंताओं ने अपने को फंसता देखा तो कागजों पर अपार्टमेंट को ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए, लेकिन गिराया नहीं गया। यही नहीं विहित प्राधिकारी के यहां तिथियों का खेल भी खत्म हो गया और फाइल दब गई।
अब अपार्टमेंट गिर गया है, इससे उन अभियंताओं के नामों की खोज शुरू हो गई है, जिनके कार्यकाल में इसे खड़ा किया गया था।लविप्रा उपाध्यक्ष डा. इंद्रमणि त्रिपाठी ने दस साल पहले बनाई गई बिल्डिंग का पूरा ब्योरा खंगालने के निर्देश दिए हैं। नक्शा पास करने वाले अधिशासी अभियंता व चीफ टाउन प्लानर दस साल पहले कौन था? प्रवर्तन का काम देखने वाले सुपरवाइजर से लेकर अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता के नाम खोजे जा रहे हैं। इनके नाम शासन को फिर भेजे जाएंगे।
वर्तमान में जोन पांच के जोनल अधिकारी ऋद्धा चौधरी है लेकिन उनके अवकाश पर रहने के दौरान जोनल अधिकारी राम शंकर काम देख रहे हैं। लविप्रा अफसरों ने बताया कि बिल्डर को कितनी नोटिस दी गई, क्या अपार्टमेंट सील हुआ, अगर सील हुआ तो उसकी सील किन शर्तों पर खुली और ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए तो बिल्डिंग गिराई क्यों नहीं गई? इन सब बिन्दुओं पर जांच के आदेश दिए गए हैं।
कैसे मिला बिजली कनेक्शन
बिजली विभाग ने बिजली कनेक्शन किस आधार पर दिया है। दस साल पहले राजभवन खंड में अधिशासी अभियंता के साथ ही एसडीओ और जेई कौन था, उसकी खोजबीन भी शुरू हो गई है। राजभवन खंड के अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार धर द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान में यहां मल्टी प्वाइंट कनेक्शन है। करीब एक दर्जन से अधिक फ्लैटों में बिजली कनेक्शन है। गुरुवार को अलाया अपार्टमेंट की फाइल पलटी जाएगी कि कनेक्शन लेते वक्त किन कागजों को सहारा लेकर बिजली कनेक्शन दिया गया था।

 

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