उत्तर प्रदेश

24 घंटे में काउंसिलिंग की नोटिस पर भड़के डॉक्टर

लखनऊ। मेडिकल संस्थानों में डीएम और एमसीएच डिग्री लेने के बाद डॉक्टरों की नियुक्ति का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नोटिस निकालने के अगले दिन बाद काउंसलिंग कराने का फैसला किया। इससे छात्र भड़क उठे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि साजिश के तहत आधी-अधूरी तैयारियों के बीच अचानक काउंसिलिंग कराई जा रही है। ऐसे में डीएम व एमसीएच डॉक्टरों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशालय में धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
डीएम व एमसीएच की डिग्री लेने के बाद बांड के तहत सरकारी मेडिकल संस्थानों में इन डॉक्टरों को दो साल सेवा देनी है। इनकी दो साल की नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर होनी है। सुपर स्पेशियालिटी की डिग्री लेने वाले डॉक्टरों ने सेंट्रल काउंसलिंग कराने की मांग की। पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना से भेंट की। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने उनकी मांग का समर्थन किया। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय को निर्देश दिया कि काउंसलिंग कराई जाए। ऐसे में महानिदेशालय की तरफ से अचानक शनिवार को काउंसलिंग की नोटिस जारी कर दी है। काउंसलिंग की सूचना आने पर डॉक्टर का गुस्सा भड़क उठा। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत से चिकित्सकों के परिवारीजन बीमार चल रहे हैं। दूर-दराज परिवार के सदस्यों को इलाज मुहैया कराये गए हैं। ऐसे में 24 घंटे में काउंसिलिंग नियमों के अनुसार नहीं है। डॉक्टरों ने काउंसिलिंग में घालमेल का इल्जाम लगाया है। पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के महामंत्री डॉ. अनिल गंगवार ने बताया कि केजीएमयू सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को खाली पदों के सापेक्ष रखने की बात पर सहमत है। पीजीआई सहित दूसरे संस्थान ने असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर रखने से मनाकर दिया है। अफसर खाली पदों का ब्यौरा छिपा रहे हैं। दूसरी तरफ सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को नियुक्त करने से परहेज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि काउंसिलिंग का पूरा ब्यौरा जारी होना चाहिए। इसमें किस संस्थान में खाली सीटों की जानकारी होनी चाहिए। आरक्षण रोस्टर के अनुसार काउंसिलिंग की जाए।

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