अपराधलखनऊ

शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के कुलसचिव सहित चार लोगों के खिलाफ शारीरिक शोषण करने का मुकदमा दर्ज

लखनऊ। लड़की हूं लड़ सकती हूं। यह नारा कहीं ना कहीं अब सटीक बैठ रहा है कि 2 साल से न्याय के लिए जद्दोजहद कर रही एक महिला ने उस समय कुछ राहत भरी सांस ली कि उसे प्रताड़ित, मानसिक व शारीरिक शोषण करने वालों के खिलाफ पारा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। 2 साल से अपने ऊपर हुए अत्याचार के लिए लगातार वह संघर्ष कर रही थी। अपने ऊपर हुए अत्याचार की लड़ाई लड़ रही शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय में सहायक कुल सचिव के पद पर तैनात महिला ने आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2018 में राज्यपाल, मुख्यमंत्री व महिला आयोग में शिकायत की थी। शिकायत के बाद आरोपियों के खिलाफ कई बार कमेटी, तो गठित की गई लेकिन हर बार कमेटी में आरोपियों ने अपने मन मुताबिक अधिकारियों को ही कमेटी में रखा। ताकि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को वह सरासर झूठला सके।
विदित हो कि शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के कुलसचिव सहित तीन लोगों के खिलाफ एक महिला सहायक कुलसचिव ने शारीरिक शोषण एवं जबरन दुष्कर्म करने का प्रयास सहित मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। पारा पुलिस ने सभी चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
महिला सहायक कुलसचिव ने कुल सचिव अमित कुमार, अमित कुमार राय, प्रो. हिमांशू शेखर झा, डॉ. अरविन्द कुमार सिंह के खिलाफ पारा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। सहायक कुलसचिव का आरोप है कि आरोपियों ने उनके साथ वर्ष 2018 में शारीरिक शोषण किया था। जिसकी उन्होंने लिखित शिकायत राज्यपाल, मुख्यमंत्री व महिला आयोग से की थी। इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया था, लेकिन आरोपियों ने मिली भगत करते हुए कमेटी के नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने मन चाहे अधिकारियों को कमेटी में शामिल कर लिया था। जिसका उन्होंने कई बार विरोध भी किया, लेकिन धीरे-धीरे आरोपियों के हौसले और बुलंद होते गये। उन्होंने यहां तक भी कहना शुरू कर दिया कि तुम एक औरत हो क्या कर सकती हो, हमारा तुम कुछ नहीं बिगाड़ सकती, अभी भी मौका है हम लोगों से समझौता कर लो। इस तरह महिला सहायक कुल सचिव का आरोपी शारीरिक शोषण के साथ ही साथ मानसिक रूप से प्रताडि़त करने लगे। हर बार विरोध के बाद आरोपियों ने कमेटी में बदलाव करते हुए एक व्यक्ति को हटाकर पूरी कमेटी पूर्ण: उसी तरह तैयार कर लिया। इस संबंध में पीड़िता सहायक कुलसचिव ने हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया। जहां हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुनः एक बार कमेटी का गठन किया गया। लेकिन उस कमेटी में अध्यक्ष पद को हटाकर अन्य सभी पदों पर उन्हीं व्यक्तियों को रखा गया जो कहीं ना कहीं उनके साथ हुए शोषण के दोषी थे। इस मामले में पीड़िता का कहना है कि अभी मुझे न्याय नहीं मिला है। अभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर हुई है। आरोपी बहुत ही पहुंच वाले लोग हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी उन्होंने अपने मन मुताबिक कमेटी का गठन कर लिया था। मैं पुलिस से यही उम्मीद करती हूं कि वह मेरे मामले की जांच निष्पक्ष होकर करें ताकि मुझे न्याय मिल सके।

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