उत्तर प्रदेश

कोहरे में लापरवाही पड़ सकती है भारी, सुरक्षित यात्रा के लिए सावधानियां जरूरी

लखनऊ। शीत ऋतु में कोहरा यात्रियों और वाहन चालकों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। घने कोहरे के कारण दृश्यता कुछ ही मीटर तक सिमट जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में यदि थोड़ी-सी भी लापरवाही हुई तो जान-माल का नुकसान हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोहरे में यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर जागरूकता जरूरी है।

पत्रकार महेंद्र सिंह के अनुसार, सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि यदि बहुत जरूरी न हो तो घने कोहरे में यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। समय की अहमियत जरूर होती है, लेकिन जीवन उससे कहीं अधिक मूल्यवान है। यदि यात्रा करनी ही पड़े तो वाहन की गति धीमी रखें और जल्दबाजी से बचें।

वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि एसी का प्रयोग करने के बजाय हल्का हीटर चलाकर उसकी हवा विंडस्क्रीन की ओर रखें, जिससे शीशे पर भाप न जमे। यदि वाहन में डिफॉगर की सुविधा है तो उसे हल्के तापमान पर चालू रखें। खिड़की के शीशे को थोड़ा खुला रखने से भी वेंटिलेशन बना रहता है और बाहर की आवाजें सुनने में मदद मिलती है।

कोहरे में कभी भी हाथ से वाहन का शीशा साफ करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसके लिए साफ, सूखे कपड़े या माइक्रोफाइबर कपड़े का ही उपयोग करें। हेडलाइट को हमेशा लो-बीम पर रखें और जरूरत पड़ने पर दिन में भी हेडलाइट जलाकर वाहन चलाएं, ताकि अन्य वाहन चालक आपको आसानी से देख सकें। साथ ही फॉग लाइट का सही उपयोग भी बेहद जरूरी है।

पत्रकार महेंद्र सिंह बताते हैं कि कोहरे में वाहन चलाते समय स्टेरियो या एफएम बंद रखना चाहिए, ताकि आसपास चल रहे अन्य वाहनों की आवाज सुनी जा सके। अपनी लोकेशन जानने के लिए नेविगेशन ऐप का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन ध्यान पूरी तरह सड़क पर ही रखें।

वाहन के आगे और पीछे चल रहे वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और अचानक ब्रेक लगाने से बचें। ओवरटेक न करें और सड़क के बीच खड़े खराब वाहनों या किनारे खड़े पार्क किए गए वाहनों से सतर्क रहें। कोहरे में अक्सर दृष्टिभ्रम की स्थिति बन जाती है, ऐसे में लेन का ध्यान रखते हुए सड़क के बाएं किनारे या डिवाइडर के सहारे वाहन चलाना अधिक सुरक्षित रहता है।

सुरक्षा की दृष्टि से निजी वाहनों के पीछे लाल रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप लगवाना बेहद उपयोगी साबित होता है। मोटर वाहन कानून के तहत व्यावसायिक वाहनों में आगे सफेद और पीछे लाल रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप लगाना अनिवार्य भी है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि कोहरे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जान भी सुरक्षित रखी जा सकती है।

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