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राजधानी में बढ़ रहा शेयररेन्ट खतरा

महेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ। राजधानी में शेयररेन्ट का खतरा बढ़ता जा रहा हैं। इस आधुनिक दौर में हर व्यक्ति सोशल मीडिया से जुड़ा है। जिसपर अपने साथ दिन भर होने वाले एक्टीविटी को शेयर करता है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे माता-पिता भी है जो अपने बच्चों के साथ पहला जन्मदिन, दूसरा जन्मदिन सहित मेरा बच्चा पढ़ने में तेज है, मेरा बेटा दूसरों बच्चों से अलग है एवं बच्चों के अन्य एक्टीविटिज को शेयर करते है। जो दिन प्रतिदिन अपने बच्चों को खतरें की ओर धकेल रहे है। माता-पिता अपने बच्चों की भविष्य की चिंता किये बिना ही सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की तस्वीर को साझा करते है। बाद में यह फोटो अगल-अलग अपराधों के लिए इस्तेमाल होता है। अगर आप अपने बच्चों की तस्वीर साझा कर रहे है तो पैरेन्ट्स नहीं शेयररेेंट है। इस तरह देश में दो तरह के माता-पिता हो गये है एक पैरन्ट्स तो दूसरा शेयररेंट। कहीं आप तो शेयररेंट नहीं है अगर है तो सावधान हो जाइये। आप जिन तस्वीरों को यादे समझकर सोशल मीडिया पर साझा करते है और आप सोचते है लाइक एवं कमेंट मिलेगा। आपके परिवार के लोग एवं दोस्त लोग देख-देखकर खुश हो। इस तरह बच्चों का एक डिजिटल डाॅटा तैयार हो जाता है और यह डाॅटा सोशल मीडिया कम्पनियां फायदे के लिए अन्य कम्पनियों को उच्चे दामों में बेच देती है। इसके बदले सोशल मीडिया वाले एप्प के माध्यम से मोटी कमाई करती है। सोशल मीडिया के जानकारों की माने तो आटिफिसियल इनटेलिंजेट्स की मदद से तीन से चार साल की बच्ची को फोटो की मदद से 15 से 16 साल की लड़की के रूप में दिखाया जा सकता है। यह तस्वीरें गलत तरीके से इंटरनेट पर कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन व यूरोप के कई देशों में हर दिन ऐसी कई घटनाएं घटती है कि माता-पिता की गलती के कारण हजारों बच्चों के वरचुअल डाॅटा का इस्तेमाल करके उनकी तस्वीरों को साइबर फ्राड एवं अन्य जालसाजी कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। यह समस्या बहुत ही गम्भीर है। हमारे देश में 92 प्रतिशत ऐसे परिवार है जिनके घर में एक व्यक्ति के पर स्मार्ट फोन जरूर है। स्मार्ट फोन के मामले में ग्रामीण भारत के लोग भी पीछे नहीं है। उदाहरण के तौर पर बता दें एक माता-पिता अपने बच्ची की आडियो एवं वीडियो क्लीप बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया करते थे। एक दिन साइबर अपराधियों ने हुबहू उस बच्ची की आपत्तिजनक आडियो क्लीप बना ली। साइबर अपराधियों ने परिवार से सम्पर्क कर ब्लैक मेल करने लगे और पैसे की डिमांड करने लगे। ऐसे कई काॅल राजधानी के हजारों युवाओं के पास आ चुकी है। हजारों युवा एवं उनके परिवार के लोगों को साइबर अपराधियों ने ठगा है। असम पुलिस ऐसे होने वाली एक्टिविटिज को देखते हुए एक जागरूकता अभियान चलाया है। जिसे डौन्ट वी अ शेयररेंट ईट का नाम दिया है।

          यह नये किस्म का साइबर अपराध है। जिसमें असम पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी किया है। जिन माता-पिता ने आज से 10 साल एवं पांच साल पहले अपने बच्चे की फोटो सोशल मीडिया पर डाली होगी। आटीफिशयल इंटेलिजेन्ट्स की मदद से साइबर क्राइम करने वाले अपराधी बच्चों की तस्वीरों को बड़ी कर उनकी आवाज एवं उनके चेहरे का उपयोग अपराध जगत में कर रहे है। सभी अभिभावकों से निवेदन है कि सोशल मीडिया पर आज से 10 साल पहले एवं 5 साल पहले डाली गयी तस्वीर एवं वीडियो को डिलीट कर दे। ताकि उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में न हो सके। आटीफिशयल इंटेलिजेन्ट्स की मदद से किसी भी व्यक्ति को जवान, बूढ़ा एवं बच्चा बनाया जा सकता है। या यू कहें कि बच्चे की तस्वीर को किशोर अवस्था और किशोर को युवा अवस्था में बनाया एवं दिखाया जा सकता है। सभी माता-पिता से निवेदन है कि अपने बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर न करें। अगर करें भी तो अपने ग्रुपों एवं फैमली ग्रुपों में करें ताकि आपके बच्चे किसी मुसीबत में न पड़े।
राजेश कुमार पाण्डेय
रिटायर आईपीएस

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