
लखनऊ। जीआरपी में तैनात सीओ पर एक तस्कर को छुड़ाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए ऐशबाग स्टेशन चौकी प्रभारी ने इस्तीफा दे दिया है। चौकी प्रभारी ने सीओ पर झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने और गाली गलौज का आरोप लगाया है।
एसपी रेलवे सौमित्र यादव के मुताबिक लिखित शिकायत नहीं मिली है। शिकायत पर जांच होगी। जबकि जीआरपी सीओ संजीव सिन्हा ने अपने ऊपर लगे आरोप को बेबुनियाद बताया है, कहा कि उसे कार्यवाही तेज करने के लिए कहा गया था।
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रविवार को मवैया क्रॉसिंग के पास ऐशबाग चौकी प्रभारी सतेंद्र सिंह ने सिद्धार्थनगर निवासी तस्कर मो. शरीफ को आरपीएफ के साथ संयुक्त टीम की तरह कार्रवाई करते हुए पकड़ा था। उससे 16 कारतूस, एक रिवाल्वर के साथ 950 ग्राम चरस मिली। चौकी इंचार्ज ने सूचना अन्य अधिकारियों को दी। नारकोटिक्स ड्रग्स टीम के इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र को बुलाकर चरस की पुष्टि कराई गई।
सीओ ने कार्यवाही न करने की दी धमकी
चौकी इंचार्ज सतेंद्र सिंह का आरोप है कि खुद को फंसते देख पहले तस्कर ने एक लाख रुपये देने का प्रलोभन दिया। मना करने पर कुछ देर में जीआरपी सीओ संजीव सिन्हा ने चौकी प्रभारी लखनऊ सिटी बिपिन सिंह के मोबाइल पर फोन कर कार्रवाही न करने की धमकी दी। घटना से क्षुब्ध चौकी इंचार्ज ने जीआरपी के वरिष्ठ अफसरों को त्याग पत्र भेज दिया है, लेकिन अब यह सवाल उठता है कि अपनी जगह पर सीओ सही है या चौकी इंचार्ज। संजीव सिन्हा इससे पहले भी आलमबाग क्षेत्र में क्षेत्राधिकारी के पद पर तैनात थे। वह बहुत ही ईमानदार छवि के अधिकारी बताए जाते हैं लेकिन चौकी प्रभारी के आरोपों को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। चौकी इंचार्ज ने ऐसा आरोप क्यों लगाए हैं इसकी जांच एक उचित कमेटी से करवाने पर ही मामले की सच्चाई से पर्दा उठ सकता है। फिलहाल इन खबरों से यह स्पष्ट हो जाता है कि पुलिस के अधिकारी अपने ही अधीनस्थ कार्य करने वालों से ही प्रताड़ित व आरोप के भागीदार बन जाते हैं।



