अपराधलखनऊ

जमीन में 50% हिस्सेदारी का लालच, 13 लाख की ठगी का आरोप; भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष घिरे

काकोरी। राजधानी लखनऊ के काकोरी क्षेत्र से जमीन के सौदे को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। काकोरी के रहने वाले एक दलित युवक ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष रविराज लोधी और उनके चचेरे भाई जय सिंह पर जमीन में हिस्सेदारी दिलाने के नाम पर करीब 13 लाख रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस मामले में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपनी जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।
पीड़ित नीरज गौतम का कहना है कि काकोरी क्षेत्र में जमीन के एक सौदे के दौरान उसे भरोसा दिलाया गया कि यदि वह रकम का इंतजाम कर दे तो जमीन में उसे 50 प्रतिशत की साझेदारी दी जाएगी। इसी भरोसे में आकर उसने अलग-अलग समय पर करीब 13 लाख रुपये दे दिए। आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपियों की नीयत बदल गई और उन्होंने जमीन में हिस्सेदारी देने से साफ इनकार कर दिया। नीरज गौतम का आरोप है कि जब उसने अपनी मेहनत की कमाई वापस मांगी तो उसे डराया-धमकाया जाने लगा। पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने उसे साफ तौर पर चेतावनी दी कि अगर वह जमीन के आसपास भी दिखाई दिया तो उसके लिए ठीक नहीं होगा। लगातार मिल रही धमकियों से भयभीत पीड़ित ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
मामले ने इसलिए भी राजनीतिक रंग ले लिया है क्योंकि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, वे खुद को लोधी समाज का हितैषी और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा बताते रहे हैं। ऐसे में एक दलित युवक से ठगी और धमकी देने के आरोपों ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सत्ता से जुड़े लोगों पर लगे ऐसे आरोपों पर अब तक कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बार-बार दोहराई जाने वाली “जीरो टॉलरेंस” नीति का जमीन पर कितना असर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सत्ता पक्ष से जुड़े पूर्व पदाधिकारी पर ही दलित से ठगी और धमकी जैसे आरोप लगते हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकार की सख्त नीति की छवि को प्रभावित करता है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामले मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति और नियत दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल पीड़ित नीरज गौतम प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। काकोरी में जमीन के इस विवाद ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है और इसकी गूंज राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस पूरे मामले में कितनी गंभीरता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।

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