लखनऊ

अवैध खनन के गड्ढे में बालक की डूब कर मौत, गुस्साए ग्रामीणों का प्रदर्शन

तालाब बताकर खेत में भी खोदाई कर बना दिए गड्ढे
लखनऊ।
राजधानी के आसपास इलाकों में खनन माफिया, खनन इंस्पेक्टर, तहसील प्रशासन के कर्मचारी व स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से लगातार खनन जारी है। काकोरी, मलिहाबाद, माल,पारा, कृष्णानगर, बंथरा, सरोजनीनगर, पीजीआई, गोसाईगंज, मोहनलालगंज सहित कई थाना क्षेत्रों में अवैध खनन का कारोबार जोरों से जारी है। लगातार शिकायत के बावजूद भी खनन माफिया व भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी व प्रशासन के लोग ने इस अवैध काम को हरी झंडी दे रखी है। इसका खामियाजा आम जनता, किसानों व मासूम बच्चों को जान गवा कर भुगतनी पड़ रही है। ताजा मामला सरोजनीनगर तहसील ग्राम सदरौना गांव का है।


सरोजनीनगर तहसील के गेट पर सोमवार को सदरौना गांव के लोगों ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए किसानों और महिलाओं का कहना था कि तालाब की जमीन पर खनन के नाम पर लेखपाल ने आगे तक खोदाई करा दी। इससे हुए गड्ढे में गिरकर खेत की देखभाल कर रहे बालक की मौत हो गई। इसी से ग्रामीण नाराज हैं। एसडीएम के समझाने के बाद किसान शांत हुए।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रताप बहादुर के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने लेखपाल पर भी खनन माफियाओं से साठगांठ का आरोप लगाया। महिलाओं ने बताया कि तालाब बताकर खनन माफियाओं ने किसानों की जमीन खसरा संख्या 1670 ओर 1671 भी खोद दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मानक से अधिक मिट्टी की खुदाई होने से तालाब काफी गहरे हो गए हैं। बीते दिनों अपने खेत की देखभाल करने गए सुमन के बेटे शुभम की उसी में डूब कर मौत हो गई। आरोप लगाया कि मानक से अधिक खोदाई कराकर करोड़ों रुपए की मिट्टी निजी कार्य में लोगों के हाथों बेच दी गई। करीब दो घंटे तक तहसील गेट पर चले घेराव प्रदर्शन के बाद किसानों ने नौ सूत्रीय ज्ञापन भी सरोजनीनगर एसडीएम आनंद कुमार सिंह को सौंपा। उधर लेखपाल का कहना है कि किसानों के आरोप निराधार हैं। कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के हाथों से सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराई गई थी। इसकी वजह से किसानों को उकसा कर यह आरोप लगाए जा रहे हैं।

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