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एचएएल की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल, केंद्रीय मंत्री कार्यालय ने मांगा विस्तृत जवाब

नई दिल्ली.

सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित दवा कंपनी हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लायजन एजेंटों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। इस मामले में एक निजी फर्म, आयुष हेल्थ केयर ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री को शिकायत भेजकर चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय मंत्री कार्यालय ने एचएएल प्रबंधन से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आयुष हेल्थ केयर ने 11 मई 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री को संबोधित पत्र में कहा कि उसने एचएएल द्वारा जारी टेंडर संख्या HAL/MAT/2026/L.A./34 दिनांक 4 फरवरी 2026 के तहत लायजन एजेंट नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन किया था। कंपनी का दावा है कि उसने पिछले तीन वर्षों के दौरान लायजन एजेंट के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है और उसके प्रदर्शन का बेहतर रिकॉर्ड भी आवेदन के साथ प्रस्तुत किया गया था। शिकायत में बताया गया है कि फर्म ने वर्ष 2024-25 में लगभग 24 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में करीब 29 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की थी, जो उसकी सक्षमता को दर्शाता है। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उसे नियुक्ति नहीं दी गई। फर्म ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में आवेदकों की पात्रता, पिछले प्रदर्शन और तुलनात्मक मूल्यांकन को निष्पक्ष तरीके से नहीं देखा गया।

आयुष हेल्थ केयर ने अपने पत्र में मंत्रालय से मांग की है कि टेंडर मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही चयन से संबंधित अभिलेखों, पात्रता मानकों, तुलनात्मक मूल्यांकन और चयनित एजेंट के चयन के कारणों की समीक्षा की जाए। फर्म ने यह भी अनुरोध किया कि जब तक शिकायत का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक नए लायजन एजेंट की नियुक्ति संबंधी निर्णय पर रोक लगाई जाए।

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब केंद्रीय मंत्री कार्यालय के निजी सचिव अखिलेश कुमार द्वारा 29 मई 2026 को एचएएल के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजा गया। पत्र में आयुष हेल्थ केयर की शिकायत की प्रति संलग्न करते हुए एचएएल से इस मामले पर विस्तृत स्टेटस नोट उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि केंद्रीय मंत्री के समक्ष विषय का परीक्षण किया जा सके। केंद्रीय मंत्री कार्यालय के पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर कंपनी अपना पक्ष और तथ्यात्मक स्थिति उपलब्ध कराए। इससे संकेत मिलता है कि मंत्रालय स्तर पर इस मामले को संज्ञान में लिया गया है।

हालांकि, इस संबंध में अभी तक हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद ही चयन प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। गौरतलब है कि एचएएल की प्रबंध निदेशक नीरजा सराफ पर इससे पहले भी गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं और उनकी शिकायत लोकपाल में भी दर्ज है। आरोपों के मुताबिक, सरकारी खरीद नियमों और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए कई ठेके संदिग्ध कंपनियों को दिए गए। यह भी आरोप है कि पुणे स्थित ऑल-स्टार इनोवेशन को गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों के बावजूद बड़ा टेंडर दिया गया, साथ ही सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग और रिश्तेदारों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति जैसे मामले भी उजागर हुए हैं। अब देखना यह होगा कि एचएएल इन ताजा आरोपों पर क्या जवाब देती है।

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