लखनऊ में बिना फायर सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही दर्जनों लाइब्रेरियां, बड़ा हादसा बना चेतावनी

लखनऊ। राजधानी में फायर सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार जानलेवा साबित हो रही है। सोमवार को अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग ने कम से कम 14 से 15 लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया कि जिस भवन में आग लगी, वहां कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
मंगलवार को मृतकों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी रही। हादसे के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तथा उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
इस दर्दनाक घटना ने राजधानी में संचालित हो रही उन दर्जनों लाइब्रेरियों और अध्ययन केंद्रों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जो बिना पर्याप्त फायर सुरक्षा व्यवस्था के बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रही हैं। कई स्थानों पर न तो अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है और न ही आपातकालीन निकास, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर अथवा अग्निशमन यंत्रों की पर्याप्त व्यवस्था है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व में भी कई बार अवैध रूप से निर्मित भवनों और बिना फायर मानकों के संचालित संस्थानों की शिकायतें की गईं, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अलीगंज हादसे के बाद भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित अवैध भवनों और लाइब्रेरियों के खिलाफ कोई व्यापक अभियान दिखाई नहीं दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते फायर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया गया तो भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं। अब लोगों की मांग है कि नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग संयुक्त अभियान चलाकर बिना फायर एनओसी के संचालित लाइब्रेरियों, कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की जांच करें तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें।



