लखनऊ

फर्जी पत्रकारों का खेल: अपराधियों के रिश्तेदार बने ‘कलम के सौदागर’

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में इन दिनों कथित पत्रकारों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की चर्चा जोरों पर है, जो पत्रकारिता की आड़ में अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने और वसूली का खेल खेलने में लगा हुआ है। सूत्रों की मानें तो इन तथाकथित पत्रकारों के पारिवारिक रिश्ते पहले से ही अपराध की दुनिया से जुड़े रहे हैं किसी का भाई आपराधिक मामलों में लिप्त है तो किसी का साला चोरी और अन्य संगीन मामलों में नामजद बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई से बचने और अपने काले धंधों को वैध दिखाने के लिए इन्होंने पत्रकारिता को ढाल बना लिया। न तो किसी मान्यता प्राप्त समाचार पत्र या चैनल से जुड़ाव, न ही पत्रकारिता की बुनियादी समझ—इसके बावजूद हाथों में कैमरा और जेब में संदिग्ध पहचान पत्र लेकर ये लोग खुद को पत्रकार बताकर खुलेआम घूम रहे हैं।

अवैध लकड़ी कटान और खनन बना कमाई का जरिया

सबसे गंभीर आरोप यह सामने आ रहा है कि ये कथित पत्रकार लखनऊ और आसपास के इलाकों में हो रहे अवैध लकड़ी कटान और अवैध खनन में सक्रिय लोगों से नियमित वसूली कर रहे हैं। जंगलों में पेड़ों की कटाई हो या नदी-नालों से बालू, मिट्टी और मोरंग का गैरकानूनी खनन—मौके पर पहुँचकर पहले वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है, फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर ₹500–₹500 रुपये की वसूली की जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर यह वसूली दैनिक या साप्ताहिक “हफ्ता” बन चुकी है, जिससे अवैध कारोबार बिना किसी रोक-टोक के चलता रहे। यही वजह है कि पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है और सरकारी राजस्व को भी चूना लग रहा है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस पर दबाव और बदनाम करने की कोशिश

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब भी अवैध खनन या लकड़ी कटान के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो यही कथित पत्रकार मौके पर पहुँचकर पुलिस कार्यवाही में बाधा डालते हैं। कभी वीडियो बनाकर अफसरों पर सवाल उठाए जाते हैं, तो कभी सोशल मीडिया पर आधी-अधूरी और भ्रामक खबरें चलाने की धमकी दी जाती है। इससे न केवल कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि ईमानदार पुलिसकर्मियों का मनोबल भी टूटता है।

असली पत्रकारिता की साख पर सवाल

वरिष्ठ और जिम्मेदार पत्रकारों का कहना है कि ऐसे फर्जी लोगों की वजह से लखनऊ में असली पत्रकारिता की छवि को गहरा नुकसान पहुँच रहा है। जो पत्रकार जनहित, भ्रष्टाचार और सामाजिक मुद्दों को उजागर करने का काम करते हैं, उन्हें भी शक की नजर से देखा जाने लगा है।

अब प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने प्रशासन से मांग की है कि

फर्जी पत्रकारों की पहचान कर सूची तैयार की जाए

मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों का सत्यापन हो

अवैध वसूली में लिप्त लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए

Related Articles

Back to top button