लखनऊ

तीन सप्ताह बीते, फिर भी FIR नहीं, कृष्णा नगर पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

लखनऊ। तहसील सरोजनी नगर के ग्राम अलीनगर सुनहरा स्थित खसरा संख्या-401, क्षेत्रफल 0.524 हेक्टेयर, जो राजस्व अभिलेखों में बंजर भूमि के रूप में दर्ज है, पर अवैध अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सामने आया है। आरोप है कि बाबूलाल व रमेश, निवासी अलीनगर सुनहरा, ने करीब 200 वर्गफुट भूमि पर ईंट, गोबर और गुमटी रखकर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया। नगर निगम द्वारा यह अतिक्रमण 21 अगस्त 2025 को उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में हटवा दिया गया था, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने कुछ समय बाद दोबारा उसी सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया।

अतिक्रमण हटाने गई टीम से अभद्रता

नगर निगम लेखपाल अनुपम कुमार के अनुसार, 9 दिसंबर 2025 को जब पुनः अतिक्रमण हटाने के लिए निगम की टीम मौके पर पहुंची, तो अतिक्रमणकारियों ने सरकारी कार्य में जानबूझकर बाधा डाली, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और जेसीबी मशीन के आगे खड़े होकर कार्रवाई को विफल कर दिया। हालात ऐसे बने कि नगर निगम अतिक्रमण हटाने में असफल रहा।

थाने में दो प्रार्थना पत्र, फिर भी कार्रवाई शून्य

घटना के बाद नगर निगम लेखपाल द्वारा 10 दिसंबर 2025 को थाना कृष्णा नगर में लोक क्षति निवारण अधिनियम सहित सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने हेतु प्रार्थना पत्र दिया गया। इसके अगले दिन 11 दिसंबर 2025 को नगर निगम कार्यालय से सहायक नगर आयुक्त (प्रभारी अधिकारी, संपत्ति) द्वारा भी अलग से लिखित प्रार्थना पत्र थाने को सौंपा गया। इसके बावजूद करीब तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी कृष्णा नगर पुलिस द्वारा न तो प्राथमिकी दर्ज की गई, न ही कोई अन्य विधिक कार्रवाई की गई।

मामला संज्ञान में नहीं—कोतवाली प्रभारी

जब इस संबंध में कृष्णा नगर कोतवाली प्रभारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामला संज्ञान में न होने की बात कहते हुए देखवाने का आश्वासन दिया।

बड़ा सवाल—आम जनता का क्या होगा?

यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जब नगर निगम जैसे सरकारी विभाग के प्रार्थना पत्रों पर ही पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो आम नागरिकों की शिकायतों का क्या हाल होता होगा?

सरकारी भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण, अधिकारियों से बदसलूकी और पुलिस की निष्क्रियता, ये सभी बातें कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक गंभीरता पर सवालिया निशान लगा रही हैं।

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