अपहृत नाबालिग का दो माह बाद भी नहीं सुराग लगा पायी पारा पुलिस, हाईकोर्ट ने जतायी नाराजगी

23 दिसंबर को न्यायालय में पेश करने के दिये निर्देश
लखनऊ। पारा थाना क्षेत्र से चार अक्टूबर को अपहृत हुई नाबालिग किशोरी का पुलिस अभी तक सुराग नहीं लगा पायी है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अर्जुन सिंह कर रहे है। लेकिन दो माह बीतने के बाद भी अपहृत नाबालिग किशोरी का पता नहीं लगा पाये। हाईकोर्ट इलाहाबाद ने नाराजगी जताते हुए पुलिस कमिश्नर एवं डीजीपी को अपहृत नाबालिग किशोरी को 23 दिसम्बर तक न्यायायल में पेश करने का निर्देश पारित किया है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अलग समुदाय के दो युवकों के एक नाबालिग लड़की को अवैध रूप से कैद में रखने के मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने पुलिस को कार्रवाई करने और 23 दिसंबर को उसके सामने पेश करने का निर्देश दिया है। पुलिस की प्रतिक्रिया पर नाराजगी व्यक्त करते हुए, उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच के न्यायाधीश विकास कुंवर श्रीवास्तव ने लड़की की मां बदला हुआ नाम (गीता मिश्रा) की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वारिस पुत्र कलीम निवासी सिकरौरी थाना काकोरी, अपने बहनोई फरीद के साथ मिलकर उसकी 15 वर्षीय बेटी का अपहरण कर उसे अवैध रूप से कैद में रखा है। इस संबंध में लखनऊ के पारा थाने में 04 अक्टूबर, 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, लेकिन दो माह बीतने के बाद भी नाबालिग किशोरी को बरामद किया गया है और नहीं दोनों आरोपियों का पुलिस सुराग लगा पायी है।
न्यायाधीश का पुलिस कमिश्नर और डीजीपी को आदेश
न्यायाधीश विकास कुंवर श्रीवास्तव ने इस मामले में लखनऊ के पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर और डीजीपी मुकुल गोयल को नाबालिग लड़की का पता लगाने और उसे 23 दिसंबर को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।



