लखनऊ

पुरानी पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की मांग

शिक्षकों ने कहा मुख्यमंत्री तक हमारी मांग नहीं पहुंचने दे रहे अधिकारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शिक्षक कर्मचारियों ने रविवार को प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता की, जिसका विषय था कि जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में भारत सरकार ने केन्द्रीय सेवा पेन्शन अधिनियम में संशोधन करते हुए उन सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को भी पुरानी पेन्शन से आच्छादित कर दिया है जिनके भर्ती की विज्ञप्ति नई पेन्शन योजना की अधिसूचना की तिथि 22.12.2003 से पूर्व हो गयी थी। यद्यपि उनका चयन एवं नियुक्ति नई पेन्शन योजना लागू होने की तिथि 1 जनवरी, 2004 के बाद हुई थी। उसी प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार को भी एक शासनादेश जारी करते हुए प्रदेश के उन सभी शिक्षको कर्मचारियों को जिनकी भर्ती की विज्ञप्ति प्रदेश में की अधिसूचना की तिथि 28 मार्च 2005 के पूर्व हुई थी यद्यपि उनका चयन एवं नियुक्ति उत्तर प्रदेश में लागू होने की तिथि 1 अप्रैल, 2005 के बाद हुई, पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाना चाहिए।
शिक्षक प्रभात सिंह ने कहा कि यह माँग किसी नीति निर्णय का विषय नहीं है, वरन् यह इस विषय पर निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जा चुका है और उसके अनुपालन में भारत सरकार ने 3 मार्च 2023 को शासनादेश जारी कर दिया है। यही नहीं हरियाणा, उत्तराखण्ड तथा कई अन्य राज्यों ने भी ऐसा ही शासनादेश जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यदि एक बार भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई तो उसकी सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। अतः इस श्रेणी में आ रहे शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पुरानी पेन्शन योजना का लाभ न देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त का उल्लंघन होगा। परन्तु शिक्षकों-कर्मचारियों की यह मॉंग मुख्यमंत्री तक ठीक से नहीं पहुँच पा रही है तथा इसे सामान्य पुरानी पेंशन की मांग समझ लिया जाता है, जबकि यह एक विसंगति मात्र है। अधिकारियों द्वारा इसे स्पष्टता के साथ मुख्यमंत्री के समक्ष नहीं रखा जा रहा है। प्रधानाचार्य डॉ. राधा मोहन मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों-कर्मचारियों की मुख्यमंत्री में पूरी आस्था है। यदि हमारी यह मांग मुख्यमंत्री तक पहुँच गई, तो हमें पूरा विश्वास है कि हमारी समस्या का समाधान हो जाएगा और प्राकृतिक न्याय की विजय होगी।
प्रेस वार्ता में शिक्षक कैलाश, अनूप त्रिपाठी, राजकुमार, अनिल गुप्ता, नन्दलाल, डॉ. रीता मिश्रा एवं कई अन्य शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे।

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