उत्तर प्रदेश

संडीला को जिला बनाने की मांग ने पकड़ा जोर, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ‘संघर्ष मोर्चा’ ने गिनाए तर्क

संडीला (हरदोई): संडीला को जिला बनाने की दशकों पुरानी मांग एक बार फिर तेज हो गई है। ‘संडीला जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा’ के अध्यक्ष शैलेश अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर संडीला तहसील को पूर्ण जनपद का दर्जा देने की पुरजोर मांग की है।

31 वर्षों से जारी है संघर्ष

​संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि संडीला को जिला बनाने की मांग पिछले 31 वर्षों से की जा रही है। पत्र में कहा गया कि संडीला उत्तर प्रदेश की 5 सबसे पुरानी तहसीलों और नगर पालिकाओं में शामिल है। यह क्षेत्र पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का कार्यक्षेत्र भी रहा है और एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित है।

हाईकोर्ट के मानकों का दिया हवाला

​संस्था ने भौगोलिक दूरी को आधार बनाते हुए तर्क दिया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जिला मुख्यालय से अंतिम गांव की दूरी 35 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वर्तमान में हरदोई मुख्यालय से संडीला की दूरी 54 किलोमीटर है और संडीला से आगे के अंतिम गांव लगभग 30-35 किलोमीटर दूर हैं। इस प्रकार हरदोई मुख्यालय से अंतिम गांव की कुल दूरी 85 से 90 किलोमीटर हो जाती है, जो जनता के लिए बड़ी असुविधा का कारण है।

नैमिषारण्य धाम को मंडल बनाने के प्रस्ताव का स्वागत

​पत्र में समाचार पत्रों के माध्यम से शासन के उस विचार का स्वागत किया गया है, जिसमें हरदोई, सीतापुर और लखीमपुर खीरी को मिलाकर नैमिषारण्य धाम को नया मंडल बनाने का प्रस्ताव है। संघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि इस नए मंडल के गठन के साथ ही संडीला को जिला घोषित किया जाए ताकि:

  • ​क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सके और नागरिकों को जिला स्तर की सुविधाएं मिलें।
  • ​शासन स्तर की सभी औपचारिकताओं और सुविधाओं का लाभ स्थानीय जनता को सुलभ हो सके।
  • ​उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के दूरी संबंधी आदेशों का अक्षरशः पालन हो सके।

​अध्यक्ष शैलेश अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री से जनहित में इस मांग पर आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।

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