लखनऊ

प्रसव पीड़ा से तड़पती विक्षिप्त महिला और उसके नवजात को मिली नई जिंदगी, अब परिजनों की तलाश

सड़क किनारे मिली बेसहारा गर्भवती महिला*

राष्ट्रीय अध्यक्ष की अपील विक्षिप्त महिला व उसकी बेटी को परिवार से मिलाने का प्रयास

लखनऊ। विदित हो कि  3 अगस्त 2025 की दोपहर जॉगर्स पार्क के पास का दृश्य किसी भी संवेदनशील हृदय को झकझोर देने वाला था। सड़क किनारे एक लगभग 35 वर्षीय गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। मानसिक स्थिति असामान्य होने के कारण वह बिना कपड़ों के केवल दर्द से चिल्ला रही थी। तमाशबीन बने लोग गुजरते रहे, पर कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।

*ममता राजपूत बनीं सहारा*

ऐसे में भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी संगठन एवं ममता महिला सेवा संस्थान की अध्यक्ष ममता राजपूत आगे बढ़ीं। उन्होंने अपनी सहयोगी दिया राजपूत को बुलाया, महिला को कपड़े पहनाए और तुरंत ऑटो से संगठन के कार्यालय लेकर पहुँचीं।

*एंबुलेंस और पुलिस की मदद से अस्पताल*

इसके बाद 108 एंबुलेंस व दुबग्गा पुलिस की सहायता से महिला को काकोरी सीएचसी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे केजीएमयू रेफर कर दिया। उसी रात करीब 9 बजे महिला ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। माँ और बेटी का इलाज 8 अगस्त तक चला और उसी दिन उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

*इलाज और पहचान*

मानवता की इस सेवा को आगे बढ़ाते हुए ममता जी ने महिला का इलाज नेशनल हॉस्पिटल एंड न्यूरो सेंटर के डॉक्टर जिलानी से कराया। धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति सुधरी और उसने अपना नाम मीरा यादव, पिता बंटू यादव, पति बिंदर, भाई रवि यादव व पता गांव सरहत, जिला पटना, बिहार बताया। बच्ची का इलाज डॉ. रवि अरोड़ा की देखरेख में किया जा रहा है।

*संगठन की कोशिशें*

महिला और उसकी नवजात बेटी की देखभाल अब संगठन ने अपने जिम्मे ले ली है। साथ ही उसके परिजनों की खोज लगातार जारी है।

*राष्ट्रीय अध्यक्ष का बयान*

इस संबंध में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष यादव ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “यह घटना मानवता की सच्ची तस्वीर है। ममता राजपूत और उनकी टीम ने जिस साहस और करुणा का परिचय दिया है, वह समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। संगठन पूरी तरह इस महिला और उसकी बच्ची के साथ खड़ा है।”

*समाज के लिए संदेश*

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि थोड़ी-सी संवेदनशीलता और तत्परता किसी की जिंदगी बदल सकती है। ममता राजपूत और उनकी संस्था ने साबित किया है कि निस्वार्थ सेवा ही सच्ची सेवा है।

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