लखनऊ

संस्था मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट ने गरीबों में किया राशन वितरण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की संस्था मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट ने मध्यप्रदेश के हिन्दू मुस्लिम एकता की प्रतीक जावरा हुसैन टेकरी जाके गरीबों को राशन वितरण किया।

मध्य प्रदेश के रतलाम से जावरा 33 किलोमीटर दूर स्थित है, यहां के प्रसिद्ध हुसैन टेकरी के प्रति सभी धर्मों की आस्था है इतिहास के मुताबिक जावरा के विश्व प्रसिद्ध हुसैन टेकरी पर दूर-दूर से आने वाले लोगों के बीच मायरा फाउंडेश ट्रस्ट के चेयरमैन शबाब हाशिम ने एक विशेष लंगर चलाया ऐसे कई जरूरतमंदों के बीच राशन वितरण कर उनकी मदद की इस विशेष मौके पर मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट के कई अन्य सदस्यों ने गरीबों और जरूरतमंदों के बीच जाकर उनके प्रति अपने सेवा भाव का जिक्र किया साथ ही उन्होंने बताया कि,भूखे को खाना खिलाने से बढ़कर कोई और इबादत नहीं है मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमैन शबाब हाशिम के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया ये सिलसिला यूं ही पिछले 10 सालों से जारी है मौला हुसैन के रोजे पर हुसैन टेकरी पर आकर ये शुरूआत बहुत छोटे स्तर से की थी और मौला ने उनको मानते हुए इस काबिल बनाया कि वो लगातार ऐसे गरीबों और जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं कोरोना काल में भी उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलावा कई और प्रदेशों पर जाकर गरीबों की मदद की। आपको बता दें कि धार्मिक आस्था,मान्यता,विश्वास और परम्परा का प्रतीक ये अति प्राचीन स्थल अपने आप में महत्वपूर्ण है इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पूरे वर्ष जायरीन आते रहते हैं,देश के सभी प्रमुख शहरों के अलावा 7 समंदर पार से भी लोग यहां होने वाले धार्मिक समारोहों में योगदान देना अपना सौभाग्य समझते हैं… मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमैन शबाब हुसैन ने इस पवित्र स्थल का जिक्र करते हुए मीडिया कर्मियों से बात की उन्होंने बताया कि,यौमे विलादत मौला इमाम हुसैन के मौके पर पिछले कई सालों की तरह इस बार भी गरीबों-जरूरतमंदों के बीच राशन बांटा जा रहा है उन्होंने कहा,आपका खाना उस समय हलाल है अगर आपके आस-पास का कोई भी एक भूखा है,इमाम हुसैन के सतके में पूरे हिन्दुस्तान की अलग-अलग जगहों पर मायरा फाउंडेशन ट्रस्ट ऐसे काम करती रहती है।
जावरा में स्थित सबसे बड़ा और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हुसैन टेकरी लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का महत्वपूर्ण केंद्र है, यहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोगों की भरपूर आस्था है, यहां के रोजे और इमामबाड़ों की अपनी विशेष महत्ता है,बरसों से चली आ रही परंपरा व मान्यता यहां आज भी असर दिखाती है, यहां जियारत के साथ मन्नतों का छल्ला बांधा जाता है जायरीन यहां पर इबादत करते हैं,लोबान की धूनी लेते हैं और आका हुसैन के दरबार में माथा टेक मन्नतें भी मांगते हैं बरसों से ये परंपरा यूं ही चली आ रही है…

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