दहेज के दोषी को पांच साल की सजा, पांच लाख रुपये जुर्माना

विवाह के लिए 2.50 लाख रुपये नकद और सोने की अंगूठी लेने का मामला
लखनऊ। दहेज प्रतिषेध अधिनियम के मामले में अपर सत्र न्यायालय, कोर्ट संख्या-18, लखनऊ के अपर सत्र न्यायाधीश प्रशान्त बिलगैयाॅं ने अभियुक्त योगेश कठैत को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के साधारण कारावास और पांच लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का भी आदेश दिया है।
अभियोजन के अनुसार, विवाह के संबंध में अभियुक्त ने पीड़िता के पिता से दहेज के रूप में 2.50 लाख रुपये नकद और एक सोने की अंगूठी प्राप्त की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के माध्यम से आरोपों को न्यायालय के समक्ष साबित किया।
अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता श्रीमती सारिका मौर्या ने प्रभावी पैरवी करते हुए गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अभियोजन के तर्क न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा-3 के तहत दोषी माना।
न्यायालय ने अभियुक्त को पांच वर्ष के साधारण कारावास के साथ पांच लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया। आदेश में कहा गया कि अर्थदंड के रूप में वसूल होने वाली धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में प्रदान की जाए। अभियुक्त को पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि का लाभ नियमानुसार दिए जाने के निर्देश भी न्यायालय ने दिए हैं।
शासकीय अधिवक्ता श्रीमती सारिका मौर्या की प्रभावी पैरवी के चलते अभियुक्त को सजा मिलने से दहेज प्रथा के खिलाफ न्यायालय का कड़ा संदेश गया है। अदालत के इस फैसले से दहेज के नाम पर लेन-देन करने वालों को कानून के प्रति गंभीर चेतावनी भी मिली है।



