दुष्कर्म और नाबालिग को भगाने के दोषी को सात साल की सजा
सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की प्रभावी पैरवी पर विशेष पॉक्सो अदालत ने सुनाया फैसला

लखनऊ। नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-3, लखनऊ विनीत नारायण पाण्डेय ने दोषी जितेंद्र कुमार पाल को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन की ओर से सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए दोषी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अभियोजन के मुताबिक, पांच जून 2017 को गोमतीनगर क्षेत्र की गीतापुरी कालोनी खरगापुर निवासी करीब 15 वर्षीय किशोरी दोपहर 2:30 बजे पड़ोस की दुकान से सामान लेने गई थी। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर स्वजन ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान पता चला कि ग्राम सुनवा, थाना मवई, जिला फैजाबाद निवासी जितेंद्र कुमार पाल उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। इसके बाद परिजनों ने गोमतीनगर थाने में सूचना दी।
मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 768/2017 में भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
साक्ष्यों से साबित हुआ आरोप
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पीड़िता, उसकी मां, चिकित्सक डॉ. सुमिता वर्मा, एफआइआर लेखक और विवेचक निरीक्षक सत्येंद्र विक्रम सिंह समेत गवाहों को पेश किया गया। सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने अभियोजन की ओर से गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
तीनों धाराओं में सजा
न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा-4 के तहत दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। धारा-363 के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड, जबकि धारा-366 के तहत भी पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर नियमानुसार पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिए जाने का भी आदेश दिया। फैसला 10 सितंबर 2026 को सुनाया गया। इसके बाद दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सजा भुगतने के लिए जिला कारागार भेज दिया गया।



