
लखनऊ। राजधानी के थाना जानकीपुरम क्षेत्र में वर्ष 2015 में 9 वर्षीय बालिका के साथ हुए दुष्कर्म के प्रयास और जान से मारने की धमकी के मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या-3, लखनऊ के विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पांडेय ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। अदालत ने अभियुक्त स्वदेश उर्फ शुभम भारती को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास और कुल 50,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
यह था पूरा मामला
वादी मुकदमा (पीडिता के पिता) द्वारा थाना जानकीपुरम में दर्ज कराई गई तहरीर के अनुसार, घटना 4 जुलाई 2015 की सुबह करीब 11:30 बजे की है. नौ वर्षीय पीड़िता जब घर से कुछ सामान लेने किराना दुकान जा रही थी, तभी पास ही रहने वाले अभियुक्त स्वदेश उर्फ शुभम भारती ने उसे बहला-फुसलाकर अपने घर के अंदर बुला लिया. घर के अंदर ले जाकर उसने बच्ची का मुंह बंद कर दिया, उसके कपड़े उतार दिए और दुष्कर्म का प्रयास किया. विरोध करने और शोर मचाने पर उसने बच्ची को बॉके से काटकर जान से मारने की धमकी दी, जिससे सहमी हुई बच्ची ने शुरुआत में डर के कारण किसी को कुछ नहीं बताया. बाद में मां द्वारा बार-बार पूछने पर पीड़िता ने पूरी आपबीती सुनाई, जिसके आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट एवं अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था.
अदालत का फैसला और सजा का विवरण
विचारण के दौरान न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की गवाहियों और साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया. सुनवाई पूरी होने के बाद 31 अगस्त 2026 को दिए गए आदेश में न्यायालय ने अभियुक्त को दो अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है।
धारा-506 भारतीय दंड संहिता के अपराध में 1 वर्ष का कठोर कारावास एवं 500 रुपये का अर्थदंड. जुर्माना न देने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) की धारा-6 के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 50,000 रुपये का अर्थदंड. जुर्माना अदा न करने पर अभियुक्त को 3 माह की अतिरिक्त साधारण सजा भुगतनी होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि अभियुक्त की दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि को इस सजा में समायोजित किया जाएगा. इसके अलावा, वसूल किए जाने वाले अर्थदंड की संपूर्ण राशि बतौर प्रतिकर (मुआवजा) पीड़िता को अदा की जाएगी। साथ ही, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ’ के मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को निर्णय की प्रति पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिलाए जाने हेतु भेज दी गई है।



