नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में दोषी को 10 साल की सजा

लखनऊ। मलिहाबाद थाना क्षेत्र से जुड़े वर्ष 2014 के नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय, कोर्ट संख्या-3 ने अभियुक्त विजय कुमार राठौर को दोषी करार दिया है। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर अभियुक्त को सजा दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पाण्डेय ने अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अदालत ने धारा 366 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है।
मामले के अनुसार, 22 मई 2014 को करीब 15 वर्षीय किशोरी घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में किशोरी का फोन आया, जिसमें उसने बताया कि उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद थाना मलिहाबाद में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
विवेचना के बाद पुलिस ने अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से संबंधित साक्ष्यों और गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित किया जाएगा। साथ ही पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिलाए जाने के लिए निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को भेजने के निर्देश दिए गए।
फैसला 13 अगस्त 2026 को विशेष पॉक्सो न्यायालय, कोर्ट संख्या-3, लखनऊ में सुनाया गया।



