लखनऊ

छात्रा को झांसे में लेकर दुष्कर्म और ब्लैकमेल करने वाले को 10 साल की सजा

लखनऊ। फर्जी प्रोजेक्ट और छात्रवृत्ति दिलाने का झांसा देकर मेडिकल की छात्रा को अपने जाल में फंसाने, होटल के कमरे में ले जाकर दुष्कर्म करने तथा अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर रुपये वसूलने के मामले में अदालत ने आरोपी मनीष श्रीवास्तव को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 46 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-18, लखनऊ प्रशांत बिलगैयाँ की अदालत ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। मामला थाना चौक से संबंधित वर्ष 2013 का है। अभियुक्त मनीष श्रीवास्तव के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 342, 376, 384, 419, 420 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता मेडिकल की छात्रा थी। 10 नवंबर 2013 को उसके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को डॉ. एसके चौधरी बताते हुए केंद्रीय स्तर पर चल रहे एक सीक्रेट प्रोजेक्ट के बारे में बताया और मेडिकल के साथ इंजीनियरिंग के छात्रों से संबंधित सर्वे व प्रोजेक्ट में काम करने का झांसा दिया। इसी बहाने आरोपी ने पीड़िता से संपर्क बढ़ाया और उसे प्रोजेक्ट के माध्यम से रुपये दिलाने का लालच दिया।
आरोप है कि आरोपी पीड़िता को होटल के कमरे में ले गया, वहां उसका दरवाजा बंद कर उसकी स्वतंत्रता बाधित की और उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। घटना के दौरान बनाए गए अश्लील वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर आरोपी ने पीड़िता को भयभीत किया और उससे धनराशि भी प्राप्त की। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन के आरोपों को विश्वसनीय माना।
अदालत ने धारा 419 में दो वर्ष का साधारण कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 420 में तीन वर्ष का साधारण कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 384 में दो वर्ष का साधारण कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 342 में छह माह का साधारण कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 376 में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 506 में दो वर्ष का साधारण कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियुक्त द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के प्रावधानों के अनुसार सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अलग-अलग अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सारिका मौर्या ने प्रभावी पैरवी की।

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