अपराधलखनऊ

जीआरपी में तैनात सिपाही चला रहा था जाली नोट का गिरोह, पांच को दबोचा

लखनऊ। राजधानी में जीआरपी का सिपाही जाली नोटों का कारोबार चला रहा था। उसने लखनऊ व आसपास के जिलों में अपना नेटवर्क फैला रखा है। जाली नोटों का कारोबार ठाकुरगंज के रिफा कालोनी से संचालित हो रहा था। डीसीपी पश्चिम की सर्विलांस व तालकटोरा पुलिस ने इस मामले में चारबाग रेलवे स्टेशन पर तैनात जीआरपी सिपाही राहुल सरोज सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए आरोपितों ने पास 81,550 जाली नोट, प्रिंटर, बांड पेपर, कटर, मोहर, एक बाइक और पांच स्मार्ट मोबाइल बरामद किए हैं। इस गिरोह से जुड़े तीन लोग अभी फरार हैं। यह गिरोह 10 हजार रुपये के असली नोट के बदले में 60 हजार रुपये जाली नोट मुहैया कराता था। पुलिस फरार चल रहे आरोपियों की तलाश कर रही है।
डीसीपी पश्चिमी सोमेन बर्मा के मुताबिक कुछ दिनों से बाजार में जाली नोट के चलन की सूचना मिली। इस सूचना के आधार पर 10 जनवरी को तालकटोरा पुलिस और डीसीपी पश्चिमी की सर्विलांस टीम ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया। छानबीन और पूछताछ के बाद जानकारी मिली इसके आधार पर मंगलवार को गिरोह से जुड़े कुछ लोग तालकटोरा आलमनगर पुल के पास आने वाले हैं। बस इसी सूचना के आधार पर मंगलवार की शाम करीब पांच बजे पुलिस टीम ने आलमनगर पुल के पास से गिरोह के दो अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से 500, 200, 100, 50 और 20 के निर्मित और अर्द्धनिर्मित नोट बरामद किए। पूछताछ की गई तो पकड़े गए आरोपियों में प्रतापगढ़ निवासी राहुल सरोज, हसनगंज निवासी सलमान, बिहार निवासी मोहम्मद मबश्शिर, हसनगंज निवासी मोहम्मद अरबाज और ठाकुरगंज निवासी शावेज खान शामिल हैं।
किराए का कमरा लेकर छापते थे नोट
आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया कि उन लोगों ने ठाकुरगंज के रिफा कॉलोनी हसियामऊ इलाके में एक कमरा किराए पर ले रखा है। उसी कमरे में आरोपित जाली नोट बनाने का काम करते हैं। इसके बाद पुलिस ने कमरे पर छापेमारी करते हुए हाई क्वालिटी प्रिंटर, पेपर, कटर, कैची, सुरक्षा धागा की जगह प्रयोग किया जाने वाला टेप, इंक, मोहर, बाइक और पांच स्मार्ट मोबाइल बरामद किया।
डीसीपी पश्चिमी के मुताबिक जाली नोट के धंधे के मामले में ट्रेवेल एजेंसी संचालक जमील, कादिर और युसूफ नाम के तीन लोग अभी फरार हैं। जमील का एसबीटी ट्रेवेल्स के नाम से एजेंसी थी। चारबाग से उसकी बस चलती थी। वहीं से उसने जाली नोट का काम शुरू किया। उस समय जमील छोटे पैमाने पर जाली नोट का धंधा करता था। जमील ने अपने सहयोगी सलमान को भी जाली नोट बनाने का काम सिखा दिया था। इसके बाद जमील ने इस काम में जीआरपी के सिपाही राहुल सरोज को जोड़ लिया। जिसके बाद से जाली नोटों का काला कारोबार तेजी से बढ़ने लगा। इसी बीच कुछ माह पहले व्यापार केरंजिश में जमील ने एक व्यक्ति को गोली मार दी थी। इस मामले में उसको जेल जाना पड़ा था। इसके बाद जमील का साथी सलमान जाली नोट बनाने का काम करने लगा।

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