लखनऊ

पॉक्सो कोर्ट ने दोषी को सुनाई उम्रकैद की सजा, 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया

नाबालिग के अपहरण व अपराध के मामले में विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पाण्डेय का फैसला

लखनऊ। नाबालिग से जुड़े अपराध के एक मामले में पॉक्सो न्यायालय ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए टाटा पुत्र छविनाथ, निवासी कठवारा को दोषी करार दिया। विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पाण्डेय की अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

अभियोजन के अनुसार मामला वर्ष 2023 में कठवारा क्षेत्र से सामने आया था। आरोप था कि आरोपी ने एक नाबालिग को बहला-फुसलाकर उसका अपहरण किया और उसके साथ आपराधिक कृत्य किया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363 व 366 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ठ)/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विभिन्न गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। इसके साथ ही प्रकरण से संबंधित साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। अभियोजन ने अदालत के समक्ष आरोपी की भूमिका और उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को प्रमाणित करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बनाया।

अदालत ने गवाहों के बयानों, प्रस्तुत साक्ष्यों और मामले के समस्त तथ्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी माना और कठोर सजा सुनाई।

तीन धाराओं में सुनाई गई अलग-अलग सजा

न्यायालय के आदेश के अनुसार आरोपी को धारा 363 के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना, जबकि धारा 366 के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया।

इसके अतिरिक्त पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ठ)/6 के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

पहले भी नाबालिग से अपराध के मामले में हो चुकी है सजा

अभियोजन के अनुसार, आरोपी के खिलाफ इससे पूर्व भी नाबालिग से इसी प्रकार के अपराध का एक मामला सामने आया था, जिसमें न्यायालय द्वारा उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जा चुकी है। बताया गया कि पूर्व मामले में सुनाई गई सजा के खिलाफ आरोपी ने अपील दाखिल की थी और अपील के दौरान वह बाहर था। अभियोजन ने मौजूदा मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के पूर्व आपराधिक मामले का भी उल्लेख किया।

सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने की प्रभावी पैरवी

अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने मामले की पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को प्रमाणित किए जाने की दलील रखी। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी माना और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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