नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दो दोषियों को कठोर कारावास, जुर्माना भी लगाया

विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पाण्डेय ने सुनाया फैसला, पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिलाने के निर्देश
लखनऊ। नाबालिग बालिका से संबंधित दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट, न्यायालय संख्या-3, लखनऊ विनीत नारायण पाण्डेय ने दो दोषियों लालाराम और रंजीत को विभिन्न धाराओं में कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 363 और 366 के तहत पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास तथा पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय ने दोषी रंजीत को धारा 368 के तहत भी पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, दोषी लालाराम को पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दोषी रंजीत को पॉक्सो अधिनियम की धारा 17 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर संबंधित दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की पैरवी और साक्ष्यों के आधार पर फैसला
अभियोजन के अनुसार, थाना नगराम में वर्ष 2015 में मुकदमा अपराध संख्या 170/2015 दर्ज किया गया था। मामले में नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने और उससे संबंधित लैंगिक अपराधों के आरोप लगाए गए थे। विवेचना पूरी होने के बाद दोनों आरोपितों के विरुद्ध अलग-अलग आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने मौखिक एवं प्रलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपितों को दोषसिद्ध करार दिया। निर्णय में दोषियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित करने का भी उल्लेख है।
न्यायालय ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिलाने के उद्देश्य से निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को भेजने का निर्देश दिया। साथ ही निर्णय की प्रति जिला मजिस्ट्रेट, लखनऊ को अनुपालनार्थ भेजने तथा दोषसिद्धि के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।



