नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सात वर्ष का कठोर कारावास, 50 हजार रुपये जुर्माना
पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने लगाया 50 हजार रुपये का अर्थदंड, पीड़िता को प्रतिकर दिलाने के भी निर्देश

सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की पैरवी के बाद आया फैसला, विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पाण्डेय ने सुनाई सजा
लखनऊ। नाबालिग से जुड़े गंभीर आपराधिक मामले में पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने दोषी दर्शन कुमार रावत को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में भी कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। यह फैसला 17 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, न्यायालय संख्या-3, लखनऊ के न्यायाधीश विनीत नारायण पाण्डेय ने सुनाया।
यह मामला सत्र परीक्षण संख्या 500/2014 और थाना पीजीआई में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 117/2014 से संबंधित है। अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 342, 376 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के अंतर्गत अभियोजन की कार्यवाही की गई थी। मामले में नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने तथा उसके साथ दुष्कर्म किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
विवेचना के बाद न्यायालय पहुंचा था मामला
अभियोजन के अनुसार, घटना के बाद पीड़िता के पिता की ओर से पुलिस को सूचना दी गई थी। इसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान संबंधित साक्ष्य संकलित किए गए और आरोपी के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद न्यायालय में मामले का विचारण शुरू हुआ।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। उपलब्ध निर्णय के अनुसार, अभियोजन पक्ष की ओर से वादी मुकदमा, पीड़िता तथा विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित गवाहों के साक्ष्य अभिलेख पर आए। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद अभियुक्त को दोषी ठहराया।
अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई सजा
न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 342 के तहत एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आदेशानुसार अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषी की इस मामले में बिताई गई जेल अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित किए जाने का भी आदेश दिया गया।
पीड़िता को प्रतिकर दिलाने के निर्देश
फैसले में न्यायालय ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिलाने के संबंध में भी निर्देश दिए। आदेश के अनुसार, अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर नियमानुसार पीड़िता को उसका लाभ दिलाया जाएगा। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को पीड़िता को नियमानुसार प्रतिकर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की पैरवी रही महत्वपूर्ण
मामले में अभियोजन की ओर से सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की पैरवी का उल्लेख किया गया है। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चली सुनवाई के बाद दोषसिद्धि और सजा का निर्णय आया। नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में इस प्रकार के फैसले पीड़ितों को न्याय दिलाने तथा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।



