नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 55 वर्षीय आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावा

लखनऊ। मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के निवासी 55 वर्षीय मैकूलाल पुत्र स्वर्गीय डल्ला प्रसाद को विशेष अदालत ने आज एक छह वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी किया गया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कुमार प्रशांत ने सत्र परीक्षण संख्या 2723/2024 (राज्य बनाम मैकूलाल) में विस्तृत फैसला सुनाते हुए आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2), 351(3), 352 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5के, 5एम/6 के तहत दोषसिद्ध किया। अदालत में अभियोजन पक्ष रखते हुए सरकारी अधिवक्ता अभिषेक उपाध्याय व अरुण कुमार अदम पैरवी द्वारा प्रस्तुत मौखिक, चिकित्सकीय एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को पूरी तरह विश्वसनीय मानते हुए आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित पाया।
घटना का पूरा ब्योरा
अदालत के अनुसार घटना 25 अक्टूबर 2024 को दोपहर करीब 11:30 बजे मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में हुई। पीड़िता की मां संगीता ने अदालत में बयान दिया कि आरोपी गांव का ही रहने वाला बुजुर्ग व्यक्ति था। वह समोसा खिलाने के बहाने लगभग छह वर्षीय बेटी को अपने साथ ले गया और पास की कुटिया में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब मां ने घटना का विरोध किया तो आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और वहां से भाग निकला।
पीड़िता की उम्र घटना के समय लगभग छह वर्ष थी। स्कूल के अभिलेखों के अनुसार उसकी जन्म तिथि 2 मार्च 2018 है और वह प्राथमिक विद्यालय भसंडा, मोहनलालगंज में कक्षा दो में पढ़ रही है। घटना की सूचना मिलते ही मोहनलालगंज थाने में मुकदमा संख्या 498/2024 पंजीकृत किया गया। जांच उप निरीक्षक यशवंत सिंह को सौंपी गई।
जांच एवं साक्ष्य
जांच के दौरान घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया, पीड़िता के पहने हुए कपड़े जब्त किए गए तथा चिकित्सकीय परीक्षण करवाया गया। स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका साध्या श्रीवास्तव ने अदालत में उपस्थित होकर छात्र रजिस्टर तथा अन्य अभिलेख प्रस्तुत किए, जिनसे पीड़िता की उम्र एवं विद्यालय में अध्ययनरत होने की पुष्टि हुई।
अदालत ने पीड़िता (पीडब्ल्यू-1) के अटूट एवं सत्यनिष्ठ मौखिक साक्ष्य, उसकी मां (पीडब्ल्यू-2) के बयान, स्कूल की प्रधानाध्यापिका के साक्ष्य तथा चिकित्सकीय रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक छह वर्षीय अबोध मासूम बच्ची के साथ हुआ यौन उत्पीड़न अत्यंत गंभीर, घृणित और निंदनीय अपराध है। ऐसे मामलों में सहानुभूति या दया दिखाकर न्यूनतम सजा देना समाज विरोधी होगा।
बचाव पक्ष के तर्क खारिज
बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि आरोपी की उम्र लगभग 55 वर्ष है, वह वृद्ध एवं बीमार है तथा उसके परिवार का जीवनयापन उसी पर निर्भर है। साथ ही पुराने जमीन-जायदाद विवाद को लेकर झूठा मुकदमा दर्ज करवाए जाने का दावा भी किया गया। अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि मात्र उम्र या पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर इतने गंभीर अपराध में रियायत नहीं दी जा सकती।



