गांधी जी के आदर्शों से पुलिसकर्मियों को कराया रूबरू, पुलिस मुख्यालय में मनाई गई जयंती

डीजीपी राजीव कृष्णा ने महात्मा गांधी के चित्र पर किया माल्यार्पण, प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने सत्य, संयम, न्याय और निःस्वार्थ सेवा को बताया पुलिस के कर्तव्यों का आधार
लखनऊ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को गोमतीनगर विस्तार स्थित पुलिस मुख्यालय में समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्रपिता को नमन किया। समारोह में गांधीजी के आदर्शों, सत्य, अहिंसा, न्याय और सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पुलिसकर्मियों को कर्तव्यनिष्ठा एवं संयम के साथ दायित्वों का निर्वहन करने का संदेश दिया गया।
समारोह की शुरुआत गांधीजी के प्रिय भजनों और रामधुन से हुई। 10वीं वाहिनी पीएसी बाराबंकी में नियुक्त रेडियो निरीक्षक विजय शंकर अग्निहोत्री और उनकी टीम ने रामधुन प्रस्तुत की। इसके साथ ही ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे लोकप्रिय भजनों का गायन किया गया। भजनों के माध्यम से राष्ट्रपिता के विचारों और उनके जीवन मूल्यों को याद किया गया।
सत्य और न्याय के रास्ते पर चलने का दिया संदेश
कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने महात्मा गांधी के आदर्शों और सिद्धांतों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संयम, सत्य, न्याय और निःस्वार्थ सेवा जैसे गांधीवादी मूल्य पुलिसकर्मियों के दैनिक कर्तव्यों से गहराई से जुड़े हैं। पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी उसके दायित्वों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने वर्ष 1897 में डरबन की घटना और वर्ष 1922 के चौरी-चौरा कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का संघर्ष अन्याय के विरुद्ध था। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को अपने आंदोलन का आधार बनाया। उनके विचार आज भी समाज और प्रशासन के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि जब पुलिसकर्मी संयम, सत्य, न्याय और सेवा की भावना से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तब वे गांधीजी के आदर्शों को व्यवहार में उतारते हैं।
अहिंसा को बताया आंतरिक शक्ति का प्रतीक
प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अहिंसा को कमजोरी या कायरता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह आत्मबल और संयम का प्रतीक है। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना, विवेकपूर्ण निर्णय लेना और न्याय के सिद्धांतों पर कायम रहना गांधीवादी विचारधारा की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। उन्होंने सोहनलाल द्विवेदी की प्रसिद्ध कविता की पंक्तियों के माध्यम से राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्ठा, त्वरित कार्रवाई और महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन के सफल प्रबंधन की सराहना की। साथ ही पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा के नेतृत्व और पुलिस बल के कर्मठ प्रयासों का उल्लेख करते हुए पुलिसकर्मियों के समर्पण को नमन किया।
प्रोफेसर को शॉल भेंटकर किया सम्मानित
समारोह के समापन पर पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह को शॉल भेंटकर सम्मानित किया। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को उपहार भेंट किए गए।
कार्यक्रम के माध्यम से महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सादगी और सेवा के संदेश को याद करते हुए पुलिसकर्मियों को जनसेवा के प्रति संवेदनशील रहने तथा अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा से निर्वहन करने की प्रेरणा दी गई।



