लखनऊ

अधिवक्ता चैंबरों के विस्थापन पर संघर्ष समिति ने उठाई आवाज, स्थायी ठिकाने की मांग

पुरानी तहसील और आरटीओ कार्यालय परिसर में चैंबर उपलब्ध कराने की मांग, मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल की चेतावनी

लखनऊ।  अधिवक्ता चैंबरों के विस्थापन से उत्पन्न समस्याओं को लेकर प्रभावित अधिवक्ता चैंबर्स संघर्ष समिति ने प्रशासन से वैकल्पिक एवं स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की है। समिति ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए कहा कि चैंबरों के हटाए जाने से प्रभावित अधिवक्ताओं को बैठने और विधिक कार्य करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अधिवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

समिति की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि प्रभावित अधिवक्ताओं को बैठने तथा न्यायिक एवं विधिक कार्यों के संचालन के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और स्थायी स्थान उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इसके लिए पुरानी तहसील परिसर और आरटीओ कार्यालय परिसर को अधिवक्ता चैंबरों के लिए उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है।

वैकल्पिक व्यवस्था में मूलभूत सुविधाएं देने की मांग

समिति ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं के लिए किसी भी वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करते समय वहां आवश्यक मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा और आवागमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। समिति का कहना है कि अधिवक्ताओं के बैठने और विधिक कार्यों की निरंतरता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन को ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

प्रेस नोट में यह भी मांग की गई है कि स्पष्ट कार्ययोजना और उचित वैकल्पिक व्यवस्था के बिना प्रभावित अधिवक्ता चैंबरों को हटाने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। समिति ने प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिवक्ताओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने का आग्रह किया है।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

संघर्ष समिति ने कहा है कि वह अधिवक्ताओं के हितों और विधिक कार्यों की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है। समिति ने अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने की बात कही है।

प्रेस नोट के अंत में समिति ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी होने तक ‘भूख हड़ताल’ की जाएगी। अब इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर प्रभावित अधिवक्ताओं की नजरें टिकी हैं।

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