सात वर्षीय बच्ची से बलात्कारः पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

लखनऊ: विशेष पॉक्सो अदालत ने सात वर्षीय नाबालिग बच्ची से क्रूर बलात्कार के मामले में अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त को भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो अधिनियम और अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत दोषसिद्ध ठहराया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) कुमार प्रशान्त ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने दोषसिद्ध मोहम्मद सरजू शेख (पुत्र अकरम शेख, निवासी सिलमपुर मोमीनपारा, जिला मालदा, पश्चिम बंगाल) को धारा 65(2) भारतीय न्याय संहिता, धारा 5एम/6 पॉक्सो अधिनियम तथा धारा 3(2)(v) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (निवारण) अधिनियम के अंतर्गत दोषसिद्ध घोषित किया।
अदालत ने अभियुक्त को पॉक्सो अधिनियम के तहत सश्रम आजीवन कारावास (प्राकृतिक जीवनकाल के अंत तक) तथा 50,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न अदा करने पर अतिरिक्त एक वर्ष का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसी तरह अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत भी आजीवन कारावास एवं 50,000 रुपये अर्थदंड का प्रावधान किया गया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में पहले से बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
मामला थाना विभूतिखण्ड का है। प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 96/2025 के अनुसार 15 मार्च 2025 को दोपहर करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के बाहर मजदूर शिविर में रहने वाली सात वर्षीय बच्ची के साथ अभियुक्त द्वारा घटना घटित हुई। पीड़िता के पिता संजीत बाल्मीकि ने थाने में तहरीर दी थी।
सरकारी पक्ष की पैरवी विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) अभिषेक उपाध्याय एवं अरुण कुमार ने की। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट, डीएनए रिपोर्ट एवं अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी पाया।
अदालत ने आदेश में कहा कि अभियुक्त द्वारा कारित अपराध की प्रकृति, पीड़िता की अत्यंत अल्पायु तथा घटना की जघन्यता को देखते हुए उसे किसी प्रकार की सहानुभूति या नरमी का हकदार नहीं माना जा सकता। ऐसे जघन्य अपराधों के विरुद्ध कठोरतम दंड आवश्यक है।
अदालत ने अर्थदंड की राशि पीड़िता के पुनर्वास में उपयोग किए जाने तथा निर्णय की प्रति दोषसिद्ध को नि:शुल्क उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।



