सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की अदम पैरवी से नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा

पॉक्सो कोर्ट-3 का फैसला, दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
लखनऊ। नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की अदम पैरवी के बाद पॉक्सो कोर्ट-3 ने दोषी बीरू को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पांडेय ने 15 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतने का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार, मामला वर्ष 2017 में इंटौजा थाना क्षेत्र का है। आरोप था कि तीन सितंबर 2017 को करीब पांच वर्षीय बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला बीरू उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी होने पर बच्ची के परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई।
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के पिता, माता, पीड़िता, चिकित्सक और प्राथमिकी लेखक सहित पांच गवाहों को पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने दोषी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। आदेश के अनुसार, मामले में पहले से जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का भी निर्देश दिया गया है।
सरकारी अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह की अदम पैरवी और अभियोजन साक्ष्यों के आधार पर आए इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



