बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है अधिवक्ता
अधिवक्ताओं के सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए आवाज उठाएंगे अरुण कुमार गिरि ‘हेमू’

सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी ने अधिवक्ताओं की समस्याओं को उठाया, बेहतर सुविधाओं और सम्मानजनक कार्यस्थल की रखी मांग
लखनऊ। अधिवक्ता समाज केवल न्यायालयों में मुकदमों की पैरवी करने वाला वर्ग नहीं है, बल्कि यह समाज के कमजोर, शोषित और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने तथा बेगुनाहों को न्यायिक संरक्षण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन विडंबना यह है कि न्याय की लड़ाई लड़ने वाले इसी वर्ग को आज न्यायालय परिसर में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं की इन्हीं समस्याओं को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी अधिवक्ता अरुण कुमार गिरि ‘हेमू’ ने अपनी बात प्रमुखता से रखी है।
अरुण कुमार गिरि ‘हेमू’ का कहना है कि अधिवक्ता समाज एक बुद्धिजीवी और जिम्मेदार वर्ग है, जो अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर दूसरों के अधिकारों की रक्षा करता है। ऐसे में अधिवक्ताओं को सम्मानजनक कार्यस्थल, बैठने की उचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
न्याय के मंदिर में अधिवक्ताओं को बुनियादी सुविधाओं का इंतजार
अधिवक्ता अरुण कुमार गिरि के अनुसार, न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए बैठने की पर्याप्त और व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्था भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए स्ट्रेचर, प्राथमिक उपचार और हृदय संबंधी आपात स्थिति में तत्काल सहायता जैसी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी अधिवक्ता या अन्य व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ने पर समय रहते उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
चैंबर तोड़ने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी
अधिवक्ताओं के चैंबरों को हटाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले अधिवक्ताओं के बैठने और काम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। वर्षों से न्यायिक कार्यों में लगे अधिवक्ताओं के लिए चैंबर केवल बैठने की जगह नहीं, बल्कि उनके पेशेवर कार्य का महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि चैंबर हटाना आवश्यक है, तो उससे पहले अधिवक्ताओं को सम्मानजनक स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उचित वैकल्पिक व्यवस्था होने पर अधिवक्ता भी नियमों के अनुरूप सहयोग करने के लिए तैयार हो सकते हैं।
उनका मानना है कि समस्या का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि संवाद, संवेदनशीलता और व्यावहारिक व्यवस्था से निकाला जाना चाहिए।
सरकार और संबंधित अधिकारियों से अधिवक्ता हितों पर ध्यान देने की अपील
अरुण कुमार गिरि ‘हेमू’ ने अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और संबंधित अधिकारियों से प्रभावी कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं। इसलिए उनके कार्यस्थल, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान से जुड़े विषयों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं विकसित करने, चिकित्सा सहायता की व्यवस्था करने और चैंबर संबंधी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।
अधिवक्ता हितों को प्राथमिकता देने का संकल्प
सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी अरुण कुमार गिरि ‘हेमू’ ने अधिवक्ता समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के लिए आवाज बुलंद करने की प्रतिबद्धता जताई।
उनका कहना है कि अधिवक्ताओं का सम्मान, उनकी सुरक्षा और उनके कार्यस्थल पर मूलभूत सुविधाएं किसी विशेष वर्ग की मांग नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यक शर्तें हैं।



