
लखनऊ। मामूली मारपीट के मामले में विवेचना के दौरान धाराएं बढ़ाने और जेल भेजने का डर दिखाकर बीस हज़ार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ़्तार हरदोई में हरियावा थाने के दरोगा राम आशीष सिंह की जमानत अर्जी भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव ने निरस्त कर दिया है।
विशेष अधिवक्ता कमल अवस्थी, महेश त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता इक़बाल ग़ाज़ी ने 21 सितंबर 2023 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी कि उसके और विपक्षी यूसुफ के परिवार के बीच 11 अगस्त को खेत में बकरी जाने पर विवाद और मारपीट हुआ। इसमें दोनों पक्षों को चोटें आई थी। पुलिस ने इसकी एनसीआर दर्ज की थी। कहा गया कि अपराध असंज्ञेय होने के बावजूद विपक्षी ने हरियावां थाने के दरोगा राम आशीष सिंह से संपर्क किया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि दरोगा राम आशीष दबाव बना रहे हैं। कह रहे है कि विवेचना में धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) बढ़ा दी गई है। दरोगा ने उन्हें धमकी दी कि 20 हज़ार रुपए दे दो तो मामला रफ़ादफ़ा कर देंगे अन्यथा जेल भेज देंगे। इस शिकायत पर एंटी करप्शन ने जांच कराई और आरोप सही पाए जाने पर 25 सितंबर को दरोगा रामआशीष सिंह को बीस हज़ार की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ़्तार किया था। कोर्ट ने अभियुक्त की जमानत अर्जी खारिज करते कहा कि अभियुक्त जो कि पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात है। उसका कर्तव्य समाज की रक्षा करना है मगर उसके द्वारा किया गया अपराध न केवल विधि विरुद्ध है बल्कि समाज विरोधी और गंभीर भी है। ऐसी स्थिति में उसे जमानत पर छोड़ने का पर्याप्त आधार नहीं है।



