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अपराधियों के साथ मिलकर अपराध कर रहे पुलिसकर्मी

लखनऊ। चंद पैसों के लालच में अपराधियों से साठगांठ कर पुलिसकर्मी अपनी नौकरी और वर्दी को दागदार कर रहे है। ताजा उदाहरण हसनगंज थाने में तैनात दरोगा अनुराग दिवेदी, हेड कांस्टेबल युसुफ हुसैन है। एक दौर था जब पुलिस अपराधियों को मुखबिर बनाकर उनसे अपराधियों का पता लगाती थी। लेकिन मौजूद समय में पैसों के लालच ने पुलिसकर्मियों अंधा बना दिया है। अब अपराधी अपनी निजी दुश्मनी एवं लूटपाट में पुलिसकर्मियों को ही योजनावध तरीके से शामिल कर रहे है। पूर्व में अपराधियों ने सआदतगंज के रहने वाले मृतक श्रवण साहू के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए योजनावध तरीके से क्राइम टीम के प्रभारी धीरेन्द्र शुक्ला, सिपाही धीरेन्द्र यादव एवं सिपाही अनिल सिंह को शामिल कर लिया था। जिसमें अकील सहित सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया था। जो आज भी चर्चा का विषय है। हसनगंज में व्यापारी के साथ हुई घटना में बर्खास्त सिपाही धीरेन्द्र यादव भी शामिल है।
विदित हो कि रविवार को बिजनौर निवासी इश्तियाक से लूटपाट एवं अपहरण करने वाले आरोपी दरोगा और हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया गया। दोपहर बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से वह जेल भेजे गए। एफआईआर में नामजद चार अन्य आरोपियों की तलाश में कई जगहों पर पुलिस ने दबिश दी। कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है। उधर मामले में लापरवाही बरतने वाले हसनगंज थानेदार इंस्पेक्टर राजकुमार को पुलिस कमिश्नर ने सस्पेंड कर दिया है।
बिजनौर निवासी इश्तियाक आजमगढ़ में पकड़ा बेचने गए थे। 29 नवंबर को बोलेरो सवार युवक उनको अगवा कर लाए थे। निराला नगर स्थित चरन गेस्ट हाउस में उनको बंधक बनाकर पीटा था। नकदी व कपडे़ लूट लिए थे। फिर परिवार वालों को फोन कर 1.20 लाख की फिरौती मांगी थी। किसी तरह से उनके चंगुल से छूटकर इश्तियाक ने पुलिस को सूचना दी थी। तब खुलासा हुआ था कि उसको अगवा करने वालों में हसनगंज थाने में तैनात दरोगा अनुराग दिवेदी, हेड कांस्टेबल युसुफ हुसैन, हिस्ट्रीशीटर दिनेश गुप्ता व नसीम, बर्खास्त सिपाही धीरेंद्र यादव, शेखर व एक अज्ञात पर एफआईआर दर्ज हुई थी। डीसीपी सेंट्रल अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि रविवार को आरोपी अनुराग व युसुफ की गिरफ्तार कर लिया गया है।
लखनऊ पुलिस की एक टीम ने बिजनौर जाकर व्यापारी का बयान दर्ज किया। जिसमें उन्होंने पूरी घटना बताई। दरअसल इश्तियाक को आरोपियों ने धमकाया था। इस वजह से वह डरकर चले गए थे। सामने नहीं आ रहे थे। पुलिस ने मामले में गहनता से जांच कर अहम साक्ष्य जुटाए हैं। सूत्रों के मुताबिक कई सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की तस्वीर कैद हुई है। ये भी साफ हो गया है कि आरोपी पुलिसकर्मी अपराधियों के साथ खुद आजमगढ़ गए थे। तब वह दोनों वर्दी में थे। साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया गया है। साथ ही मोबाइल नंबर की लोकेशन आदि बेहद अहम सुराग है।

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