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गृह मंत्रालय को शहीदों या देशद्रोहियों का पता नहीं, सीईसी ने कहा जल्दी बनाएं डाटाबेस

गृह मंत्रालय को शहीदों या देशद्रोहियों का पता नहीं, सीईसी ने कहा जल्दी बनाएं डाटाबेस

‘देशभक्त’ और ‘राष्ट्र विरोधी’ जैसे संबोधनों को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय से उन लोगों की सूची सार्वजनिक करने को कहा है जो कथित राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए देशद्रोह के मामलों का सामना कर रहे हैं.

आयोग ने मुरादाबाद के रहने वाले पवन अग्रवाल की ओर से दायर आवेदन पर यह निर्देश दिए. अग्रवाल ने एक आरटीआई आवेदन के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय से उन लोगों की सूची मांगी थी जिन्हें ‘‘शहीद’’ और ‘‘राष्ट्रविरोधी घोषित’’ किया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह आवेदन गृह मंत्रालय के पास भेज दिया था.
गृह मंत्रालय को शहीदों या देशद्रोहियों का पता नहीं, सीईसी ने कहा जल्दी बनाएं डाटाबेस

गृह मंत्रालय के पास नहीं है इससे जुड़ी कोई जानकारी
गृह मंत्रालय ने इसका जवाब दिया कि उसके पास ऐसी कोई सूची नहीं है जिसमें लोगों को ‘‘देशभक्तों’’, ‘‘शहीदों’’ या राष्ट्र विरोधियों के रूप में वर्गीकृत किया गया हो. इसलिए सूचना मुहैया नहीं करायी जा सकती. मंत्रालय ने कहा था कि उसने निश्चित पैमाने एवं मानक के आधार पर किसी व्यक्ति को ‘‘देशभक्त’’, ‘‘देशद्रोही’’ या ‘‘शहीद’’ के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया या लोगों की इस तरह की श्रेणी का कोई आंकड़ा नहीं रखा.

कई लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं देशद्रोह के मामले
सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने आदेश में कहा, ‘‘प्रतिवादी ने कहा कि आरटीआई अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण आवेदक को केवल वह सूचना मुहैया कराने के लिए उत्तरदायी है जिसका कोई रिकॉर्ड है और जो प्राधिकरण के पास मौजूद है या उसके नियंत्रण में है.’’

अग्रवाल ने भार्गव के सामने सुनवाई के दौरान दावा किया कि कई लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मामले दायर किए गए हैं.
आवेदक ने साथ ही कहा कि इसलिए गृह मंत्रालय के पास ऐसे लोगों का ब्यौरा होना चाहिए जो राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल हैं. इसी तरह मंत्रालय के स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित विभाग के पास भी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों से संबंधित जानकारी होगी.

भार्गव ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों के दावे को सुनने और रिकार्ड पर ध्यान देने के बाद आयोग का मानना है कि राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक 2014 में देशद्रोह के 47 मामले दर्ज किए गए थे. इसलिए राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों की जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि अगर गृह मंत्रालय के पास सूचना उपलब्ध नहीं थी तो आरटीआई आवेदन उस सार्वजनिक प्राधिकरण के पास भेजा जाना चाहिए था जिसके पास इस तरह की सूचना होती है.

सूचना आयुक्त ने कहा कि एक दूसरे मामले से उनकी जानकारी में आया है कि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद संस्कृति मंत्रालय की एक परियोजना पर काम कर रही है जिसका नाम ‘‘शहीदों का शब्दकोश (भारत का स्वतंत्रता आंदोलन :1857 से 1947)’’ है.

भार्गव ने निर्देश दिया, ‘‘आयोग ने यह भी कहा था कि गृह मंत्रालय के पास स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी सूचना का विश्वसनीय भंडार होना चाहिए. इसलिए आयोग गृह मंत्रालय के सीपीआईओ (मुख्य सार्वजनिक सूचना अधिकारी) को अपने पास उपलब्ध बिंदुवार जानकारी आवेदक को देने का निर्देश देता है. जिसकी जानकारी उनके पास नहीं है और साथ ही संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण को आरटीआई आवेदन भेजने का निर्देश देता है.’’